भारत की धरती का मान बढ़ाने
फिर उदित हुआ एक सूरज है
संविधान की समुचित रखवाली करने
संकल्पित नवयुग नायक तैयार है।
भारत माता के सपनों को लेकर
जो पग-पग नपे मातृ धरा को
वो चलता है प्रीति के पथ पर
मानवता की अलख जगाने को।
कर्म क्षेत्र इस भूमी पर
जब संकल्प लिया कर्त्तव्यों का
तब तब गर्व से फहरती है
कर्मयोगियों की विजय पताका।
बिखरी अब नव आशा की किरणें,
उज्ज्वल भविष्य के काया में।
सत्य की ज्योति लगी जगने अब,
जहाँ भय‑लोभ शासन चलता है।
एक पथ प्रदर्शक ने फिर खोज लिया है
गौरवान्वित जानता की अभिलाषा को
अभिनंदन की लालसा उठी आज इस मनमें है
शीश नवाउ गले लगाऊ करुणा अपार इस मन में है
वंश की गरिमा, बलिदान की गाथा,
उसके जीवन की यही परिभाषा।
पंडित नेहरू का वंशज है वो
उत्तरदायित्व उस पर विशेष है
हर्ष शोक के द्वन्दो में
सिद्धि असिद्ध के छंदो में
सदा सर्वदा सम रहता
कर्मयोगी कभी ना बंधता।
मेहनत परिश्रम की आरी से
संघर्ष लगन की चिंगारी से
श्रम से सिद्धी कि राह दिखाने
संकल्पित नवयुग नायक तैयार है।
